मेरी ये कवितायें सिर्फ अपने लिए हैं
मेरे हर साहस, हर कायरता लिखने के लिए है
हर जगह पानी न रोको मेरे माज़ी
ये पानी है, ये बहने के लिए हैं
ना ख़ुशी में इसे ज़ोर से पकड़ो, ना ग़म में इसे तेज चलाओ
इसकी अपनी चाल है, ये सरकने के लिए है
क्यों सर पकड़ के बैठ गए, जब कोई तारा टूटा
इंसानों की पानी ज़ात है, ये बदलने के लिए है
ऐसा नहीं है दोस्तों ज़िंदगी रवां हो गयी
हर खोई हुई चीज़ मिलने के लिए है
मेरी ये कवितायें सिर्फ अपने लिए हैं
मेरे हर साहस, हर कायरता लिखने के लिए है
(28/06/2009)
Comments
Post a Comment