अलख - १




निकले मोहब्बत का खजाना जुटाने के लिए
    दो हाथ कमाने के लिए, हज़ार हाथ लुटाने के लिए







ये अशआर १९ सितम्बर २००९ को लिखा था, शायद कहीं से बुरी तरफ असफल होकर लौटा था :)

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