ऐसा नहीं कि भूल गए हैं तुम्हे





ऐसा नहीं है कि भूल गए हैं तुम्हे,
बस ऐसे ही बसर करने का मन है

अभी तक तो बच्चे हो गए होंगे तुम्हारे
घुटने भी चलने लगे होंगे,
जैसे हमारा इश्क़ कभी चला था,
तोतली ज़ुबान में इज़हार भी किया था हमने
फिर सब बदला, और हम पैरों पे खड़े हो गए

मुश्किलें अब खुद की बहोत कम हैं
शायद तुम्हे अभी भी धूप चुभती होगी,
और तुम्हारी नाक कम गुलाबी अब भी ज्यादा सफ़ेद लगती हो,
मोज़े भी रोज़ाना धोये जाते हैं

अरहर और चने में फर्क समझने लगा हूँ
गेंहू और पिसे गेंहू को माप सकता हूँ
बिजली और अदरक भी सोच समझ के खर्चता हूँ
बस तुम्हारा कमरा छोटा नहीं होता ज़ेहन से

सिटी भी बजाते हैं कभी कभी 
बस पक्के सुर निकलते हैं अब 
सिगरेट छोड़ नहीं पाए है 
निकोटिन साला फेफड़ों का ईंधन बन गया है

बेचारे तो हैं, पर बेचारापन नहीं है 
सोशल मीडिया पे हम आज भी सुखी हैं 

मत आना यहाँ , जा नहीं पाओगी
जहाँ भी हो, खुश रहो








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