on April 09, 2016 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps जिंदगी चल रही है कहीं बिखर रही है, कहीं सम्हल रही है । कभी शरीफ थी ये आज इससे बड़ा हब्सी कोई नहीं नहीं कभी अल्हड थी ये आज इससे समझदारो की कमी नहीं Comments
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